Monday, September 21, 2015


क्या भारत एक धार्मिक देश है?
छत्तीस करोड़ देवता। हर गली नुक्कड़ पर मंदिर!हर वर्ष  राम ,हनुमान ,दुर्गा ,लक्ष्मी - गणेश और शिव का जोर शोर से उत्सव के साथ पूजन !हर वर्ष गली नुक्कड़ और बड़े बड़े मैदानों में रावण और होलिका के रूप में बुराई पर अच्छाई का  विजय उत्सव! साप्ताह के सात दिनों में से पांच दिन कोई न कोई व्रत उपवास ---------किन्तु ये कैसा धार्मिक देश है ?संवेदन हीन !प्राण हीन !कैसी कैसी घटनाएँ रोज पढ़ने सुनने में आ रही हैं। बेटियां गर्भ में ही मार दी जाती हैं या माँ बेटी को मार  देती है ,बहन भाई को !पुलिस अपराधियों को पनाह देती है शिक्षक नक़ल कराता है। पैबंद लगा हुआ देश.!असहिष्णुता चरम पर है। युवा पीढ़ी भ्रमित है। दिशाहीन  ,भटकी हुयी !नक़ल ,आरक्षण ,घोटालों और भाई भतीजा वाद के बीच  नीति -अनीति के पैमाने बदल गए हैं। राजनीतिज्ञ सत्ता के चूल्हे पर अपनी अपनी रोटियां सेंकने में लगे हुए हैं. न जाने कब कौन  किस बात पर किसकी हत्या कर दे रहा है जरा ज्यादा गर्मी ,सर्दी या बारिश हो गयी तो लोग कीड़े मकोड़ों की भांति मरने लगते हैं।एक तरफ  कर्ज में डूबे किसान आत्महत्या कर रहे हैं तो दूसरी तरफ शहरों में अनियोजित कंक्रीट के जंगल उगे आ रहे हैं। बड़े बड़े मालों में विदेशी कंपनियों के महंगे शो रूम और फैशन के नशे में चूर समाज का एक छोटा सा वर्ग। हर तरफ द्वंद्व है। दोहरा समाज....दोहरा बर्ताव   दोहरी मानसिकता । औरतों से लोग अपेक्षा करते हैं कि पढ़े लिखें -----घर से बाहर  निकालें!लेकिन घर के बाहर उनकी सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं। घर में भी वो दोहरी मानसिकता और दोहरे शोषण की शिकार है। चार साल की बच्ची बहशी दरिंदों के सामूहिक दुष्कर्म का शिकार बन जाती है। और तो और औरत घर के अंदर भी कहाँ सुरक्षित है ? घरेलू हिंसा ,भेदभाव या शारीरिक मानसिक हिंसा आम भारतीय औरत की कहानी है। हाँ अब  विरोध के स्वर भी मुखर होने लगे हैं ----लेकिन फिर भी मुझे लगता है कि भारत से बड़ा अधार्मिक देश और कोई नहीं !

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Tuesday, September 1, 2015

वर्तमान घटनाक्रम पर प्रस्तुत हैं कुछ हाइकु।

1. हीरे सी लगे
  ग्लैमर की दुनिया
   कांच ही कांच

2 दौड़ते लोग
  उपभोक्तावाद में
   मज़िल नहीं

3 काले चेहरे
   सफेदपोश लोग
   टूटते रिश्ते

4 पैसों की भूख
  रिश्ते बने मजाक
   हुआ व्यापार

5 कलयुगी माँ
बेटी बनी दुश्मन
पैसा ही दोस्त

6 खुली  परतें
  चेहरा बेनकाब
   झूठ ही झूठ

   मंजुश्री