Monday, August 22, 2016

जोड़ी नंबर वन  (लघुकथा)
आज फिर सरिता ने मुझे फ़ोन किया और देर तक विजय की शिकायतें करती रही।सरिता,मेरी सबसे अच्छी सहेली!पांच साल हो गए विजय से उसकी शादी को ,मगर लगता है पति पत्नी अभी भी एक दूसरे को समझ नहीं पाये हैं।आये दिन उनके छोटी बड़ी बात पर झगडे होते रहते,कभी बच्चे को लेकर ,कभी पैसों के उपयोग को तो कभी विजय के बहुत व्यस्त रहने को लेकर। सरिता बहुत दुखी होकर मुझसे अपनी व्यथा कथा शेयर करती।पिछले कुछ दिनों से तो वह विजय से तलाक लेने की बात करने लगी थी।मैं बड़ी मुश्किल से उसे संभालती।कई बार मैं खिन्न हो जाती थी,रोज रोज वही राग।मगर सुनने के अलावा कोई चारा न था।एक दिन रविवार की सुबह सरिता का फ़ोन आया ।बोली "आज मुझे और विजय को एफ एम् रेडियो के जोड़ी नंबर वन लाइव कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया है।बेस्ट फ्रेंड के कॉलम में मैंने तेरा नंबर दिया है ,दोपहर 12 बजे तू तैयार रहना।"12 बजे मैंने रेडियो ऑन कर दिया।आर जे सिमरन सरिता और विजय से बात कर रही थी-'विजय जी,बताइये सरिता जी में आप को कौन सी खूबियां नजर आती हैं?"
"मैं खुद को बहुत लकी मानता हूँ कि मुझे सरिता जैसी केयरिंग पत्नी मिली है।मैं अपने जॉब की व्यस्तताओं के कारण घर पर ज्यादा समय नहीं दे पाता।सरिता बहुत प्यार से बच्चों कोऔर माँ पिता जी को संभालती है।ये घर की और मेरे जीवन की धुरी है।इनके हाथ का बना खाना कोई खा ले तो उंगलिया चाटता रह जाये।ऊपर से ये बहुत अच्छा गाती भी हैं"विजय अपनी रौ में मुस्कुराते हुए बोले जा रहा था।
फिर तो एक लाइन गा कर सुना दीजिये सरिता जी।आर जे ने कहा।
"ये मोह मोह के धागे तेरी उँगलियों से जो उलझे---"
सरिता सुर में गा रही थी।
उसका गाना समाप्त होने के पश्चात् तालियां बजी और मेरा मोबाइल घनघना उठा।
दुसरी तरफ से आवाज आई-"आयुषी जी, मैं एफ एम रेडियो से बोल रही हूँ।अपनी बेस्ट फ्रेंड सरिता के बारे में आप कुछ बोलना चाहेंगी
"सरिता मेरे बचपन की सहेली है।बहुत होशियार ,बहुत गुणी मगर थोड़ी भोली है,और हाँ थोड़ी गुस्सैल भी।शायद भावुक लोग जितना गुस्सा करते हैं ,उतना ही प्यार भी।मगर वो जैसी भी है मुझे बहुत प्रिय है।"
मैंने कहा
सरिता जी अब आप अपने पति के बारे में कुछ बताइये।
सरिता चुप रही
"अरे ,बोलिये भी शर्माने की क्या बात है।
"विजय बहुत अच्छे इंसान हैं।
गंभीर,स्मार्ट,हैण्ड सम, इंटेलिजेंट! व्यस्त रहने के कारण वे कभी कभी मुझे समय नहीं दे पाते मगर वे मेरी हर जरुरत का ध्यान रखते हैं।आई रियली लव हिम टू मच-----
मैं कान लगाये आश्चर्य से सुन रही थी!

Thursday, July 28, 2016

शिक्षकों की बायोमेट्रिक उपस्थिति -कितनी प्रासंगिक ?

क्या कॉलेज लेक्चरर्स  और उनके शिक्षण  कार्य को बायोमेट्रिक उपस्थिति के दायरे में बाँधा  जा सकता है?कदाचित नहीं ! एक सच्चे शिक्षक के लिए शायद उसकी अंतर आत्मा ही सबसे बड़ी बायोमेट्रिक मशीन है। फिर ऐसे समय में जहाँ कॉलेज लेक्चरर्स  को अध्यापन के अतिरिक्त भी अनेक कार्य करने होते हैं...जैसे शोध ,कैम्प्स ,सेमिनार ,रिफ्रेशर ओरिएंटेशन कोर्सेज ,शिक्षणेतर गतिविधियां  इत्यादि। और अब जब बहुत सारी पक्रियाएँ ऑनलाइन हो गयी हैं ,किसी भी समय आपको आदेश की पलना के लिए तैयार रहना  होता है। ऐसे समय में सवा पांच घंटे तक केवल अंगूठा लगाने के लिए रुके रहना बेमानी है । क्या एक शिक्षक सवा पांच घंटे के बाद कुछ भी अध्ययन न करे ? इस बात को कैसे सुनिश्चित किया जायेगा की जबरदस्ती रोके जाने वाला लेक्चरर अपनी कक्षाएं ईमानदारी से ले रहा है या नहीं। मेरे विचार से सवा पांच घंटे  की बाध्यता की जगह यह सुनिश्चित किया जाना जरुरी है कि सभी कक्षाएं नियमित रूप से हो रही हैं और छात्रों की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है। लेक्चरर्स की बायोमेट्रिक मशीन  के साथ छात्रों की उपस्थिति कप सुनिश्चित करने के लिए उनके लिए भी बायोमेट्रिक उपस्थिति होनी चाहिए साथ ही महाविद्यालयों में लाइब्रेरी व अन्य सुविधाएँ  विकसित होनी चाहिए ताकि समय का अपव्यय न हो। यदि कोई शिक्षक अपने कर्तवयों के लिए ईमानदार है तो वह बायोमेट्रिक मशीन द्वारा तय समय सीमा से कहीं बहुत आगे जा कर विद्यार्थियों और महाविद्यालय के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।
डॉ मंजुश्री गुप्ता 

Monday, September 21, 2015


क्या भारत एक धार्मिक देश है?
छत्तीस करोड़ देवता। हर गली नुक्कड़ पर मंदिर!हर वर्ष  राम ,हनुमान ,दुर्गा ,लक्ष्मी - गणेश और शिव का जोर शोर से उत्सव के साथ पूजन !हर वर्ष गली नुक्कड़ और बड़े बड़े मैदानों में रावण और होलिका के रूप में बुराई पर अच्छाई का  विजय उत्सव! साप्ताह के सात दिनों में से पांच दिन कोई न कोई व्रत उपवास ---------किन्तु ये कैसा धार्मिक देश है ?संवेदन हीन !प्राण हीन !कैसी कैसी घटनाएँ रोज पढ़ने सुनने में आ रही हैं। बेटियां गर्भ में ही मार दी जाती हैं या माँ बेटी को मार  देती है ,बहन भाई को !पुलिस अपराधियों को पनाह देती है शिक्षक नक़ल कराता है। पैबंद लगा हुआ देश.!असहिष्णुता चरम पर है। युवा पीढ़ी भ्रमित है। दिशाहीन  ,भटकी हुयी !नक़ल ,आरक्षण ,घोटालों और भाई भतीजा वाद के बीच  नीति -अनीति के पैमाने बदल गए हैं। राजनीतिज्ञ सत्ता के चूल्हे पर अपनी अपनी रोटियां सेंकने में लगे हुए हैं. न जाने कब कौन  किस बात पर किसकी हत्या कर दे रहा है जरा ज्यादा गर्मी ,सर्दी या बारिश हो गयी तो लोग कीड़े मकोड़ों की भांति मरने लगते हैं।एक तरफ  कर्ज में डूबे किसान आत्महत्या कर रहे हैं तो दूसरी तरफ शहरों में अनियोजित कंक्रीट के जंगल उगे आ रहे हैं। बड़े बड़े मालों में विदेशी कंपनियों के महंगे शो रूम और फैशन के नशे में चूर समाज का एक छोटा सा वर्ग। हर तरफ द्वंद्व है। दोहरा समाज....दोहरा बर्ताव   दोहरी मानसिकता । औरतों से लोग अपेक्षा करते हैं कि पढ़े लिखें -----घर से बाहर  निकालें!लेकिन घर के बाहर उनकी सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं। घर में भी वो दोहरी मानसिकता और दोहरे शोषण की शिकार है। चार साल की बच्ची बहशी दरिंदों के सामूहिक दुष्कर्म का शिकार बन जाती है। और तो और औरत घर के अंदर भी कहाँ सुरक्षित है ? घरेलू हिंसा ,भेदभाव या शारीरिक मानसिक हिंसा आम भारतीय औरत की कहानी है। हाँ अब  विरोध के स्वर भी मुखर होने लगे हैं ----लेकिन फिर भी मुझे लगता है कि भारत से बड़ा अधार्मिक देश और कोई नहीं !

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Tuesday, September 1, 2015

वर्तमान घटनाक्रम पर प्रस्तुत हैं कुछ हाइकु।

1. हीरे सी लगे
  ग्लैमर की दुनिया
   कांच ही कांच

2 दौड़ते लोग
  उपभोक्तावाद में
   मज़िल नहीं

3 काले चेहरे
   सफेदपोश लोग
   टूटते रिश्ते

4 पैसों की भूख
  रिश्ते बने मजाक
   हुआ व्यापार

5 कलयुगी माँ
बेटी बनी दुश्मन
पैसा ही दोस्त

6 खुली  परतें
  चेहरा बेनकाब
   झूठ ही झूठ

   मंजुश्री